शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

रीते पेट

आज नही था कल जैसा 
कल न जाने क्या होगा 
मौसम संग सम्पूर्ण आस
जो बिता गया कल न होगा

करवट बदलते पेट रीते 
चाँद तारे संग में जीते 
फूस कहीं सिर का न खोये 
विश्वास तुमेह भरना होगा

मौसम तेरी दहाड़ आजसी 
रीते बर्तन बजा गयी   
बेधुन रीते, जग हंसाई
धुन बर्तन भरना होगा

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