शनिवार, 29 अक्तूबर 2011

रिश्ते

रिश्तों पर नज़र तुम रखते हो 
रिश्तों को नज़र लग जाती है 
प्रेम से है बनी हर रिश्ते की नीव 
वो प्रेम की नीव हिल जाती है

खुदा के बनाये है रिश्ते सभी 
शक कोई खुदा पर कैसे करे 
इल्जाम खुदा पर जब भी लगा 
खुदा की खुदाई हिल जाती है

क्या सुनते कहते सबसे हैं वो
वो ही जाने ये उनकी हैं बातें
खुद को उनमे खुद फंसा कर
रिश्ते में लकीर पड़ जाती है

यकीन हो तो अपना रिश्ता
इस जहान में कभी न रिस्ता
प्रेम जो बांटो आँख मूंद तुम
रिश्तों की झड़ी लग जाती है  

रिश्तों पर नज़र तुम रखते हो 
रिश्तों को नज़र लग जाती है 
प्रेम बना हर रिश्ते की नीव 
वो प्रेम की नीव हिल जाती है
एक टिप्पणी भेजें