सोमवार, 19 मार्च 2012

दूरियां

सूरज दूर बैठा देखे भूखा रहे न कोई
अंधकार जो कहीं दिखे चमकाए वोई

सागर देख चंदा दौड़े पकड़ने को किरन
दुरी न कम प्रेम अजब भड़काए अगन

दूरियां न करती कभी प्रेम में कोताही
नयनन दूर होते तजे प्रेम जाने नाही

प्रेम न माँगा जाए कभी अपने आप ही आये
उपजाए न उपजे कभी उपजे कभी न जाए

  
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