गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

राधे में

जो रम गया राधे राधे 
वो थम गया राधे राधे
गिरधर की मुरलिया न्यारी 
मोहन की मूर्ति प्यारी 
बांके को जिसने देखा 
सम्मोहित खड़ा सरीखा 
आँखे ने पल भी झपकी 
बस  खो गया राधे राधे   

कान्हा कान्हा का सुर है 
जो भटकाए आसुर है 
मेरे जीवन की नदी में 
कान्हा का पैंठा दर है 
कान्हा को रटते रटते 
रहूँ कान्हा के भंवर में    
कुछ और मुझे न सूझे
मै रम गया राधे राधे 


नैनो में वो है समाया
मेरे घट घट में वो आया
मेरी रग रग बहता जाये
मेरी जिव्या उसे ही गाये
मेरे नैन मूंद उसे देखें
तन उसी का नाम लपेटे
मुझे  चिंता  न  बीमारी 
मै गाऊं जो राधे राधे 

जो रम गया राधे राधे 
वो थम गया राधे राधे
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