सोमवार, 4 अप्रैल 2011

वक्त

हमने खुदा से माँगी बीमारी 
सोचा वो आयेंगे हाल पूछने 
उन्होंने कब्रिस्तान की राह ली
हमारे लिये कब्र की तलाश में  


रविवार, 3 अप्रैल 2011

अजब गजब सी दुनिया सारी

अजब गजब सी दुनिया सारी
अजब गजब लगा रेला है 
जो चढ़ता वो पूजा जाता 
जो गिरता, पाता ढेला है 

दुनिया में जो रोंदे जाते 
वो कहते हमने झेला है 
रोंदने वाला जब मिलता 
कहते प्रभु का चेला है 

वस्त्रों में निर्वस्त्र रहकर 
उनका चलन अकेला है 
वो बढ़ चलें हम चल चलें 
बदरंगों ने रंग ये खेला है 

अपमान हमारे मान उन्हें 
काहे का चढ़ा अभिमान उन्हें 
हम न सहते, वो क्या कहते 
ये घर करता, तू अकेला है 

शनिवार, 2 अप्रैल 2011

मेरी शादी

कल तक था मै एक कुंवारा 
गलियों फिरता था आवारा 
आज मुझ पर रोक लगा दी
क्योंकि आज है मेरी शादी 

शशि रंजना सब रोयेंगी
टीना मीना बाट जोहेंगी 
रीना सुनीता सभी गंवादी
क्योंकि आज है मेरी शादी

पीलिये का बुखार हो गया
हल्दी संग अब प्यार हो गया
खूबसूरती की परत चढ़ा दी 
क्योंकि आज है मेरी शादी

अपना कमरा अपना पलंग 
बंद दरवाजा पड़े अधनंग
कैसे छोड़े जिसके थे आदि   
क्योंकि आज है मेरी शादी

पुराने पत्र पुराने सब चित्र 
कैसे ताड़ेंगे वो हसीन मित्र 
अब बंधे खूंटे आज़ादी त्यागी
क्योंकि आज है मेरी शादी

नून तेल लकड़ी का भाव
मिर्च मसाला रोटी पुलाव 
मोल भाव के होंगे हम आदि 
क्योंकि आज है मेरी शादी

एक डर अब सदा खायेगा 
छुपा लो, पता लग जायेगा 
दिल की छमिया बुआ बनादी
क्योंकि आज है मेरी शादी

अब हम बच्चों के मामा होंगे
परायी देख ना आँख मलेंगे 
जिंदा होंगे मौत के ही आदि 
क्योंकि आज है मेरी शादी   

 

सोमवार, 28 मार्च 2011

नैन

नैनो से लड़े जब नैन
ना सुख पाया ना चैन
पथराये से खोये खोये
कुछ ढूंढ़ रहे सब रैन

नैनो के द्वारे कसक
मन में उठती है टीस
प्रेम की सुनती धमक 
अंगो में चलती चीस
बेदर्दी दर्द को बढ़ाकर
हरने लगते सुख चैन  

लाज आती ज्यूँ मिलते
नहीं मिलते तो मचलते
तुमको न कहीं खो जाएँ
पग संभल संभल चलते
नहीं सोते नहीं जग पाते
बावरे हुए फिरतें ये नैन 

सावन के अंधे  हो गए
तुम्हारे रूप संग खो गए
जादू कर चुरा के जीवन
हम सम्मोहन में सो गए
नहीं चाहें टूटे अब नींद
तुम्हे कैद कर गये नैन

नैनो से लड़े जब नैन
ना सुख पाया ना चैन
 

रविवार, 27 मार्च 2011

खाज खुजा सूजन दबा

अजब गजब से विचार जब आते  हैं मगज
शरीर की सारी इन्द्रियां हो जाती हैं सजग
गर्मी का मौसम,  भारी शरीर,  गिरे धड़ाम
चोट न थी पर दर्द की खुलने लगी दुकान
लंगड़ाते से चल पड़े लेने दवाई उस दर्द की
तभी हमे सलाह मिली भिखारी हमदर्द की            
बाबु मामूली दर्दों से क्यों घबराते हो तुम
डॉक्टर की तुम फीस से हो जाओगे सुन्न
खाज, घमोरी, सूजन, खुरंड न करते ये तंग
ये तो अपने साथी हैं तुम खेलों इनके संग
खाज खुजाओ, सूजन दबाओ, पाओगे आनंद  
डॉक्टर छोड़, देखो अपने हाथ है परमानन्द 
ज्यों बढ़ेगी खाज तेरा हाथ नहीं हट पायेगा
सूजन को दबाता रह सूजा  ही मिट जायेगा  

सारांश

मानव जीवन का सारांश 
मनुष्यता पूर्ण वृतान्त 
क्रोध, लोभ, घृणा राजसी    
क्षमा, सहन संत अन्तरांत      
भोग भोगना नही जीवन
त्याग से होता जीव शांत
नफरत का ना बीज उपजे   
प्रेम देवताओं सा देवांश    

 

गुरुवार, 24 मार्च 2011

प्रेम

प्रेम प्रेम तो सब कहें, प्रेमार्थ न जाने कोई|
जो प्रेमार्थ जान लो, प्रेम सा दुःख न कोई || 

दुःख का अंत प्रेम है
प्रेम का आदि दुःख|
जो प्रेमार्थ का ज्ञान है
प्रेम में छिपे सब सुख||