रविवार, 27 मार्च 2011

खाज खुजा सूजन दबा

अजब गजब से विचार जब आते  हैं मगज
शरीर की सारी इन्द्रियां हो जाती हैं सजग
गर्मी का मौसम,  भारी शरीर,  गिरे धड़ाम
चोट न थी पर दर्द की खुलने लगी दुकान
लंगड़ाते से चल पड़े लेने दवाई उस दर्द की
तभी हमे सलाह मिली भिखारी हमदर्द की            
बाबु मामूली दर्दों से क्यों घबराते हो तुम
डॉक्टर की तुम फीस से हो जाओगे सुन्न
खाज, घमोरी, सूजन, खुरंड न करते ये तंग
ये तो अपने साथी हैं तुम खेलों इनके संग
खाज खुजाओ, सूजन दबाओ, पाओगे आनंद  
डॉक्टर छोड़, देखो अपने हाथ है परमानन्द 
ज्यों बढ़ेगी खाज तेरा हाथ नहीं हट पायेगा
सूजन को दबाता रह सूजा  ही मिट जायेगा  

सारांश

मानव जीवन का सारांश 
मनुष्यता पूर्ण वृतान्त 
क्रोध, लोभ, घृणा राजसी    
क्षमा, सहन संत अन्तरांत      
भोग भोगना नही जीवन
त्याग से होता जीव शांत
नफरत का ना बीज उपजे   
प्रेम देवताओं सा देवांश    

 

गुरुवार, 24 मार्च 2011

प्रेम

प्रेम प्रेम तो सब कहें, प्रेमार्थ न जाने कोई|
जो प्रेमार्थ जान लो, प्रेम सा दुःख न कोई || 

दुःख का अंत प्रेम है
प्रेम का आदि दुःख|
जो प्रेमार्थ का ज्ञान है
प्रेम में छिपे सब सुख|| 
 
 
 

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

बदलाव

१.

सुबह की किरणे
नवजीवन लायें 

ज्यूँ फैलाएँ  डैने
त्यूँ फैलाएँ अग्न

ढलन को पहुँचे
सुध लाये थकन   


२.  
हर सुबह
नई जागृती
दूजा पहर
सूर्य कीर्ति
बुझती किरणे 
छुपती धरती         

रविवार, 13 फ़रवरी 2011

प्रेम

तुम हो मेरी सेज संगनी
तुम ही मेरी प्रिय संगनी

तुम को देख प्रेम उपजा
प्रेम नदी का प्यासा हूँ मै
तुम वो प्यास बुझाने आई
बन कर तुम मेरी अर्धांग्नी

रूप तुम्हारा नैनो में बसता
होंठ हैं सूखे देखें वो रासता
डर ह्रदय में एक ही बसता
बढ़ ना जाये प्रेम की अग्नि

जितना चाहा प्रेम घटाना
उतना इसकी लौ बढ़ जाये
दीप के पास भंवरा मंडराए
जला उसे पछताए अग्नि

जग में मुझे कुछ ना भाए
बंद नैन तुम्हे खो ना जाये
डर कर जीता जाता हूँ मै
प्राण छुटे पर ना छुटे संगनी

तुम हो मेरी सेज संगनी
तुम ही मेरी प्रिय संगनी
 

   
         

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

अंतिम हिसाब

ना जुलुस ना समारोह फिर यह कैसा सैलाब है
राजीव हमारे पाप पुण्य का ये अंतिम हिसाब है

गुरुवार, 27 जनवरी 2011

ह्रदय आत्मा

रात पर न दोष मढो दिन भी है समान
पाप पुण्य करने को हैं यह दोनों मकान
रात ढकती अँधेरे से दिन छुपाता काम 
आंख खुली पर न दिखे ये जग जहान
भ्रमित रहे अंतर्मन दोष सके ना जान
समझ फेर बुद्धि फिरें बनता है भगवान
अपना ह्रदय आत्मा से बस देख जहान 
राजीव समझ आए तब दूर हो दुष्काम