गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

प्रेम धर्म

सुन लो ये है प्रेम कहानी
तुमने न सुनी तुमने न जानी
चाऊ की जान, थी चाई बस्ती
चाऊ बिना न, चाई की हस्ती
यौवन आया, अग्न लगाया
दोनों बन बागी, विवाह रचाया
सुखी जीवन फल फूल रहा था
तीन कलियों से घर महका था
सुख की सीमा थी अपरम्पार
चिंता मुक्त बस प्यार ही प्यार

एक दिन ऐसा तूफान आया
चाऊ का चाई पर शक गहराया
दोस्त जो प्यार में ईर्ष्या करते
कान भरे और कलंक लगाया
प्यार दोनों का नजर खा गई
चाऊ के दिल ने अपराध पाया
खरीद खंजर पहुंचा घर अंदर
बुद्धि बंद चाई का खून बहाया        
अपराध गहरा पुलिस का पहरा
सजा हुए तो पश्चाताप छाया

तीनो कलियों की किस्मत चमकी
चाई की जान जीसस से बक्शी 
सज़ा हुई पूरी थी शर्मिंदगी दुरी
चाऊ चाई पास, जा भी न पाया
चाऊ चाई बिना, फिरे मारा मारा
अंदर से दुखी, शरीर से वो हो लाचारा
लगने लगा बस, जाने को अब है वो
पूछा भाई कोई,  क्या है तुम्हारा
आँखे बह निकली, चाई सिवा न कोई
पर कैसे मै जाऊं, भरा  पाप से सारा

चाई सुनते ही सब, बेसुध हो भागी
भूल गई बीती, प्रेम कलियाँ जागी
घर लाते ही, सेवा को धर्म माना
चाऊ ने पाया, दूसरा जन्म जाना
प्रेम ले आया, चाऊ चाई सा धर्म
भूल गये सब, वक्त के दिए वो मर्म
समय ने कब , किसको है बक्शा
चाऊ चाई चले गये, छोड़ ये शिक्षा
प्रेम धर्म से बढ़ कर न कोई
प्रेम होई तो चाऊ चाई सा होई 
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