मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

गलतफहमी का शिकार

ये कहानी है उस हंसते हुए इन्सान की
जो खो गया कहाँ न जान सका जहान भी

हँसता हँसाता था आंसू सबके सुखाता था
वो सबका सब उसके कोई गैर न बताता था
एक दिन सब मिले ख़ुशी में झूम झूम मचले
आज वो दूल्हा बना बनकर देखो कैसे ठना
नजर न उसको लगे हाय न उसको पड़े
हर तरह के काजल उसके छुप छुप लगे
दुल्हन उसकी आई  दुनिया ने ली बलाई
परिचय में सभी चाची ताई बहन बताई

दुल्हन चकरा गई रिश्ते सुन घबरा गई
पूछ बैठी तभी ये सब सगी हैं या पराई 
दुल्हे ने समझाया सबसे प्यार मैंने पाया
खून से न सही दिल से रिश्ता निभाया
एक कुटिल मुस्कान दुल्हन दिखला गई
मन ही मन कसमसाई और झल्ला गई
समय बीतता गया दूल्हा सिमटता गया
धीरे धीरे दूर हो वो सिमित हो सा गया

पहला फूल खिला, बहिन को हक बुआ मिला
दुल्हन ने बहिन का भी दिया रिश्ता हिला
दुल्हे के मन के अंदर दर्द यूँ  जमने लगा
कुछ समय में ही वो मिलने से बचने लगा 
रिश्ते हैरान थे असल से वो अनजान थे
अंदर की ख़ामोशी से हर दिल परेशान थे
उसने हंसते हुए सब दर्द खुद ही सहे
हो रहा था जुदा बिन जुबान कुछ कहे

पर रिश्ते थे प्यार के मिलते यूँ यदा कदा
दुल्हन जान पड़ते ही चली तोड़ रिश्ता सदा
प्यार के रिश्तों को उसने दे दिया वो  नाम
रिश्ते हो शर्मशार बदले सब मरे समान
रिश्तों को कर बदनाम गंदा दे दिया नाम
बहिन भी बदनाम चाची को गंदा  नाम
दूल्हा बदनामी से डर कर यूँ सहम गया
लगा प्रभु का उसपर जो रहम था गया

दुल्हे ने समझाया रिश्तों का महत्व बताया
दुल्हन कुछ न पिघली अलग होने वो निकली
गलतफहमी का शिकार घर की करने लगी फाड़
अडिग अपनी जिद पर ऐसे ज्यूँ जंगल में ताड़
अनहोनी ने वो किया दूल्हा दीखता  बीमार
दुल्हन की नादानी ने किया दूल्हा  लाचार
बोझिल आँखे धीरे धीरे तन्हाईयों में खो चली
हंसता चेहरा बुझ गया आँखें नम सब हो चली 

दुल्हन पड़ी गई अलग थे प्यार के रिश्ते सजग
कमी न होने देंगे पर खोया वो था कुछ अलग
दुल्हन की आँख खुली देखा छायी है  काली घटा
अरमान धरे रह गये खो चुकी थी वो हंसमुख छटा
एक नादान अग्नि में जल कर हुई खुद स्वाह
न लौट सकेंगे वो अब जिनको कर दिया तबाह
दुल्हे राजा माफ़ करो दुल्हन संग इन्साफ करो
मन तभी बोल उठा जैसा किया अब तो वही भरो   
        
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