शनिवार, 16 जुलाई 2011

बम धमाके, आतंक

हजारों लोग हैं यहाँ
यहाँ है फिर भी सन्नाटा
अचानक रुक गई है जिंदगी
किसने है इसे बांटा

यहाँ से कौन है गुज़रा
जो उजड़ी है ये फुलवारी
किसकी है ये करतूतें
जो हो गई मौन किलकारी

ना समझो हमे यूँ कमज़ोर
क्यूँ ललकारते हो दम
आए जो तुम कभी सामने
पाओगे तुम दना दन दन

उठे जो गलत निगाहे
उस निगाह को फोड़े हम
कोई जो पुष्प तोड़े हाथ
वो हाथ ना छोड़े हम


आओ सबको बतलाएं
यहाँ हमने है क्या सिखा
हर जात के पुष्प को
अपने लहू से हैं सींचा

अगर जो याद है बाबा
तो कान्हा भी ना भूले हम
एक और शांति का पाठ
दूजा गीता का मंथन

पडोसी की निगाहें हमको
अब चोरी से बचाएंगी
भाई भाई को भाई
ना कोई भाई बनायेंगी

आज जो दूर हो हमसे
ना भूलो हो हमारा अंश
हमारी माँ सगी बहने
आज हम मौसिओ के संग

कोई जो खोट हो दिल में
उस खोट को खोलो तुम
वर्ना रिश्तेदारी भूल के
रिश्तो की जड़े चीरें हम

जब हम रिश्ते में भाई है
क्यूँ कर सोचे होए जंग
अगर जो खुल गई जंग
तो हम काम आयेंगे

अपने लहू से सींच कर
ज़मी को सुर्ख बनायेंगे
बोएँगे असला खेतो में
जो राजीव बम्ब कहायेंगे

हे प्रभु एक प्रार्थना है बस तुम देना ध्यान
ना हो जंग पैदा बम्ब इतना ही दो वरदान
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