सोमवार, 4 जून 2012

जिंदगी आती नहीं

तुमने आना बंद किया है जिंदगी आती नहीं
मौत जो थी महबूबा वो अब समझ पाती नहीं

तेरे नाम के सिवाय और कुछ भाये कहाँ
जानते हो तुम भी अब ये छोड़ हम जाएँ कहाँ
हैं तुम्हारे ही सहारे जिंदगी पायेंगे कहाँ
पा जाते हम भी किनारा छोड़ जो जाती नहीं

प्यार का सागर समझ कूद हम इसमें गये
भंवर जोहती बाट थी तब डूब हम इसमें गये
न इधर के न उधर के बाहर अब जायें कहाँ 
डूबने का डर न होता तुम जो ठुकराती नहीं

नयनो ने तुमको देखा देखते ही रह गये
ज्यूँ मरु में जल हो प्यासे होंठ कह गये
भीगना न था न भीगे वो सूखे सूखे रह गये
आज राजीव की  चाहत थोड़ी भी बाकि नहीं
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