बुधवार, 10 अप्रैल 2013

प्रभु हनुमान


संकटमोचनजी हनुमान बनाते सबके बिगड़े काम
तुमेह हम शीश नवाते हैं बदन सिंदूर लगाते हैं

जब बन बन भटके राम
किये तुमने ही सारे काम
बचाये लक्ष्मण जी के प्राण

संकटमोचनजी हनुमान बनाते सबके बिगड़े काम
तुमेह हम शीश नवाते हैं बदन सिंदूर लगाते हैं

ढूंढी सीता सागर लांघ
भस्मी लंका तुम तमाम
अंजनी माई की तुम जान

संकटमोचनजी हनुमान बनाते सबके बिगड़े काम
तुमेह हम शीश नवाते हैं बदन सिंदूर लगाते हैं

ना कोई है तुमसा बलवान
ना कोई सेवक तुम समान  
बुद्धी में काटो हो कान

संकटमोचनजी हनुमान बनाते सबके बिगड़े काम
तुमेह हम शीश नवाते हैं बदन सिंदूर लगाते हैं

जपे जो कर में तेरो नाम
उसके डर का काम तमाम
ह्रदय में रहे तेरो ही ध्यान

संकटमोचनजी हनुमान बनाते सबके बिगड़े काम
तुमेह हम शीश नवाते हैं बदन सिंदूर लगाते हैं

देके सर्व सुख चारों धाम  
मिटा असुरों का नामोनिशान
जिनके ह्रदय बस्ते राम   

संकटमोचनजी हनुमान बनाते सबके बिगड़े काम
तुमेह हम शीश नवाते हैं बदन सिंदूर लगाते हैं
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