शनिवार, 9 मार्च 2013

खाली खाली

रकीब से चाहत है इस हद तक
वो आया उनकी याद दे गया
उसको गले से लगाया हमने
तन मन उनकी महक दे गया

उनकी मंशा विरूध दिल में बसाया
ना चाहते हुए भी सबसे सब कह गया
अब डरतें हैं जहान से कुच करने में
दफनाना, देखना दिल संग ना रह गया 

वीरान थे हम आशियाँ खाली पड़ा था
देखा जो उसे गुलशन ही महक गया
हमारा मकान तो एक मकान ही रहा
भले दूजे के मकान को घर कह गया


 
एक टिप्पणी भेजें