शुक्रवार, 18 जून 2010

यही तो है आज का समाज

एक दूजे की करें बुराई
इसमें हमें दिखे भलाई
यह ही चमचागिरी का राज
यही तो है आज का समाज

झूठ से चलती दुनिया सारी
सच्चाई फिरती मारी मारी
यह है हमारा चरित्र आज
यही तो है आज का समाज

तेरी इज्जतबस मै उतारू
तुझको फिर भी मै धिकारून
यह है बचा भाईचारा आज
यही तो है आज का समाज

जो कुछ कहूँ ना रखूँ याद
खाऊ जीतने के बाद
यह है अपना नेता आज
यही तो है आज का समाज
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