रविवार, 29 दिसंबर 2013

ऐसा वैसा


छुपाना पड़े जो चेहरा कुछ ना हो ऐसा वैसा
दागी ना हो वस्त्र कभी जो लगे ऐसा वैसा

मिलजुल सब लोग रहे लगे एक परिवार जैसा
एक जगह सर्वधार्मिक काम लगे संसार जैसा

पहनावा कुछ ऐसा हो बट ना सके जात जैसा
खाना सबको मिले सदा मिले दाल भात ऐसा

मस्तिषक में भर प्रभु सब के कुछ एक जैसा 
देख एक दूजे को ना आये विचार ऐसा वैसा  
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