रविवार, 11 सितंबर 2016

मत से मत भटको

दलदली नेताओं से अपने देश को बचायेंगे
पुराने पन्ने फाड़ अब नया ग्रन्थ रचाएंगे  

झाड़ू को झटको हाथ को पटको
कमल को तोड़ो हाथी को फटको
निक्कमा नेता कहीं दिखे यदि
कुत्ते छोडो मत से मत भटको 
बुधि का उपयोग कर मोहर सही लगायेंगे  

दलदली नेताओं से अपने देश को बचायेंगे

जब से हम आज़ाद हुये हैं
आबाद कम बर्बाद हुये हैं
जिसको चुनते वोही हमें भूनते
दीखते नहीं पर रुई से धुनते
ऐसे दोगले साँप अपना फन कुचल्वायेंगे

दलदली नेताओं से अपने देश को बचायेंगे

चुनकर जो भी आता है, पेट फटे तक खाता है
जनता भूखी सोती घर उसका भरता जाता है
चुनते ही देखो दीनहीन धन्ना सेठ हो जाता है
क्या कुबेर का वृक्ष वहीँ फल अपना बरसाता है
ऐसे पूंजिवादों को चलो समाजवाद सिखलाएंगे


दलदली नेताओं से अपने देश को बचायेंगे 
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